महाराष्ट्र में NCP का भविष्य: अजित पवार के निधन के बाद विलय, सुनेत्रा पवार और प्रफुल पटेल की भूमिका
महाराष्ट्र की राजनीति में NCP के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर हलचल तेज है। अजित पवार, शरद पवार, सुनेत्रा पवार और प्रफुल पटेल की भूमिका पर चर्चा।
महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) गंभीर बदलाव के दौर से गुजर रही है, खासकर डिप्टी सीएम अजित पवार के हाल ही में विमान हादसे में निधन के बाद। इस घटना ने पार्टी के अंदर नेतृत्व, संगठन और भविष्य की राह को लेकर व्यापक समीकरण बदल दिए हैं।
अजित पवार का निधन और NCP पर असर
बारामती में हुए विमान दुर्घटना में अजित पवार का असामयिक निधन न सिर्फ राज्य सरकार में एक बड़ा राजनीतिक शून्य छोड़ गया है, बल्कि NCP के भीतर नेतृत्व और राह को लेकर चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक पार्टी में स्पष्ट सेकेंड-इन-कमांड का अभाव है, जिससे नेतृत्व संकट उत्पन्न हुआ है।
सुनेत्रा पवार को लेकर चर्चा
अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का नाम अब पार्टी में एक नई राजनीतिक भूमिका के लिए उभर रहा है। कई वरिष्ठ NCP नेताओं ने इसे पारिवारिक विरासत और पार्टी प्रचलन को जारी रखने का एक तरीका बताया है, जिससे सुनेत्रा को राज्य कैबिनेट में शामिल करने या उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग उठी है।
कुछ NCP विधायकों और पार्टी नेताओं ने सुनेत्रा पवार को NCP का अगला नेतृत्वकर्ता बनाने तथा उन्हें उपमुख्यमंत्री पद के लिए प्रस्तावित करने की वकालत की है, क्योंकि यह कदम पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में साझा भावना से भी जुड़ा है।
प्रफुल पटेल की भूमिका
पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। वे NCP के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में तेजी से उभर रहे हैं और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से विचार-विमर्श करने के लिए भी मिले हैं। ऐसे में पार्टी के नेतृत्व संबंधी निर्णय में उनका प्रभाव बढ़ रहा है।
NCP के दोनों गुटों के बीच विलय
पिछले कुछ समय से शरद पवार के नेतृत्व वाले NCP (अलग गुट) और अजित पवार के गुट के बीच पारिवारिक और राजनीतिक विलय की बातचीत चल रही थी। यह बातचीत दोनों पक्षों के बीच एकता की दिशा में काम कर रही थी, मगर अब अजित पवार के निधन के बाद यह प्रक्रिया अस्थिर हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुनेत्रा पवार का नाम न केवल पार्टी के नेतृत्व के लिए उभर रहा है, बल्कि विलय बातचीत को आगे बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है, क्योंकि परिवार की भावनात्मक शक्ति निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
आगे क्या?
इस समय NCP के भीतर दो प्रमुख विकल्प सामने हैं:
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सुनेत्रा पवार को पार्टी की कमान सौंपना और भविष्य के चुनावी मुकाबले का नेतृत्व करना।
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प्रफुल पटेल या अन्य वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में रणनीति बनाना, खासकर राज्य और राष्ट्रीय गठबंधन में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए।
इन सभी चर्चा-बातों से यह साफ होता है कि NCP के अगले कदम का निर्णय न केवल पार्टी के भीतर के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर निर्भर करेगा, बल्कि राजनीतिक समीकरणों और गठबंधनों पर भी असर पड़ेगा।