सुप्रीम कोर्ट ने विजय की 'जन नायकन' फिल्म के प्रोड्यूसर की याचिका ठुकराई, हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने 15 जनवरी 2026 को थलापथी विजय की फिल्म जन नायकन के सेंसर विवाद पर प्रोड्यूसर की याचिका खारिज की। हाईकोर्ट को 20 जनवरी तक फैसला करने का निर्देश।

सुप्रीम कोर्ट ने विजय की 'जन नायकन' फिल्म के प्रोड्यूसर की याचिका ठुकराई, हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने 15 जनवरी 2026 को तमिल फिल्म 'जन नायकन' के प्रोड्यूसर की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने प्रोड्यूसर को मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के पास जाने का निर्देश दिया।

विवाद की पृष्ठभूमि

फिल्म 'जन नायकन' थलापथी विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही है, क्योंकि वे अब राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। फिल्म 9 जनवरी को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) से सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने के कारण विवाद खड़ा हो गया।

एक सिंगल जज बेंच ने 9 जनवरी को सीबीएफसी को सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया था, लेकिन डिवीजन बेंच ने इसे तुरंत स्थगित कर दिया। प्रोड्यूसर KVN प्रोडक्शंस ने मद्रास हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

जस्टिस दीपांकर दत्ता और ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट में मामले की तेजी पर सवाल उठाए। बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था। सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने प्रोड्यूसर का पक्ष रखते हुए देरी से हो रहे आर्थिक नुकसान का हवाला दिया।

कोर्ट ने हाईकोर्ट को अपील पर 20 जनवरी तक फैसला करने का निर्देश दिया, लेकिन खुद कोई अंतरिम राहत नहीं दी।

फिल्म और राजनीतिक कनेक्शन

'जन नायकन' विजय की तमिलागा वेट्री कझगम (TVK) पार्टी से जुड़ी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाली फिल्म है। सीबीएफसी ने कुछ सीन काटने की शर्त पर U/A 16 सर्टिफिकेट की सिफारिश की थी, लेकिन रिवीजन कमिटी को भेजा गया। इससे रिलीज में देरी हुई।

आगे की संभावनाएं

प्रोड्यूसर को अब मद्रास हाईकोर्ट पर निर्भर रहना पड़ेगा। देरी से फिल्म को भारी नुकसान हो रहा है, जैसा कि कोर्ट में बताया गया। मामला सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया और फिल्म रिलीज की तत्परता पर केंद्रित है।