ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय ने राघव चड्ढा को बताई 10 मिनट डेडलाइन की सच्चाई | गिग वर्कर्स की जीत

राघव चड्ढा के साथ ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय की बातचीत से 10 मिनट डिलीवरी के दबाव का खुलासा। केंद्र ने ब्रांडिंग हटाई, गिग वर्कर्स को राहत।

ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय ने राघव चड्ढा को बताई 10 मिनट डेडलाइन की सच्चाई | गिग वर्कर्स की जीत

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने हाल ही में एक ब्लिंकिट डिलीवरी पार्टनर को अपने घर पर भोजन के लिए आमंत्रित किया, जहां डिलीवरी बॉय ने 10 मिनट डिलीवरी की दबावपूर्ण वास्तविकता खुलासा की। यह घटना गिग वर्कर्स की कठिनाइयों को उजागर करती है।

डिलीवरी पार्टनर की कम कमाई का खुलासा

ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय हिमांशु ने बताया कि उन्होंने 15 घंटे में 28 डिलीवरी पूरी कीं, लेकिन केवल 763 रुपये कमाए। राघव चड्ढा ने संसद में इस मुद्दे को उठाया, जहां उन्होंने गिग इकोनॉमी में शोषण की बात कही। हिमांशु ने रात के शिफ्ट्स में लूट और दुर्घटनाओं का खतरा बताया।

10 मिनट डिलीवरी का दबाव

10 मिनट की समय सीमा डिलीवरी एजेंट्स पर मानसिक तनाव और जान का जोखिम डालती है। ग्राहक दबाव और ऐप टाइमर के कारण राइडर्स तेज गति से ड्राइव करने को मजबूर होते हैं। चड्ढा ने खुद एक दिन डिलीवरी पार्टनर बनकर इन चुनौतियों का अनुभव किया।

केंद्र सरकार का हस्तक्षेप

केंद्र सरकार के निर्देश पर ब्लिंकिट जैसी कंपनियों ने 10 मिनट डिलीवरी ब्रांडिंग हटा ली। राघव चड्ढा ने इसे गिग वर्कर्स के लिए बड़ी जीत बताया और कहा, "सत्यमेव जयते।" NITI आयोग के अनुसार, भारत में गिग वर्कर्स की संख्या 2029-30 तक 2.35 करोड़ हो जाएगी।

गिग वर्कर्स के अधिकारों की मांग

चड्ढा ने पीएफ, बीमा और उचित वेतन की मांग की। डिलीवरी पार्टनर्स को लिफ्ट से प्रतिबंधित किया जाता है और कमाई घटकर 12 रुपये प्रति डिलीवरी रह गई। यह आंदोलन श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।