अमेरिका में H-1B वीज़ा नियमों में बड़ा बदलाव: लॉटरी सिस्टम अब समाप्त, नई ‘सैलरी-आधारित’ चयन प्रक्रिया प्रस्तावित
23 सितंबर, 2025 को अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने H-1B वर्क वीज़ा के चयन में आमूलचूल बदलाव का प्रस्ताव दिया है। दरअसल, अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने मौजूदा लॉटरी सिस्टम को समाप्त कर एक वेटेड सिलेक्शन (भारित चयन) प्रक्रिया लागू करने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें ज़्यादा वेतन और ज़्यादा कुशल अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
नई प्रस्तावित चयन प्रक्रिया
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वेतन स्तर के आधार पर चयन: अब H-1B वीज़ा के चयन में सबसे अहम भूमिका आवेदक के वेतन (सैलरी लेवल) की होगी। जो कर्मचारी सबसे ऊंचे सैलरी बैंड (वेतन स्तर IV, लगभग $162,528 प्रतिवर्ष) में होंगे, उन्हें चयन पूल में चार बार एंट्री मिलेगी, यानी उनके चुने जाने की संभावना चार गुना बढ़ जाएगी। जबकि सबसे निचले सैलरी बैंड (वेतन स्तर I) के लिए एंट्री सिर्फ एक बार ही होगी।
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अब लॉटरी में सबकी बराबर संभावना नहीं: अब तक H-1B वीज़ा के लिए लगभग हर आवेदक के पास चयनित होने की समान संभावना थी—यह प्रणाली अब समाप्त हो रही है। नई वेटेड सिस्टम में ज़्यादा सैलरी वाले एवं अनुभवी प्रोफेशनल्स के चयनित होने की संभावना बढ़ जाएगी, जबकि फ्रेश ग्रेजुएट्स और शुरुआती करियर वालों के लिए मौका कम रह जाएगा।
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कंपनियों पर असर: यह बदलाव बड़ी और स्थापित कंपनियों (जो ज़्यादा वेतन दे सकती हैं) के लिए फायदेमंद होगा, लेकिन छोटी कंपनियों या स्टार्टअप्स, जिनमें जूनियर लेवल की भर्ती ज़्यादा होती है, उनके लिए H-1B स्पॉन्सर करना मुश्किल होगा।
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$1,00,000 का एक्स्ट्रा फीस: इस प्रस्ताव से कुछ दिन पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने H-1B वीज़ा के नए आवेदनों पर $1,00,000 (लगभग 83 लाख रुपये) का एक्स्ट्रा फीस शुल्क भी लागू कर दिया है। यह शुल्क अब तक $215-$5,000 के बीच था, जिसमें एकाएक बड़ा उछाल आया है। यह शुल्क सिर्फ नए आवेदनों पर लागू होगा, मौजूदा वीज़ा धारकों या रिन्यूअल पर नहीं।
अमेरिकी प्रशासन का तर्क
व्हाइट हाउस ने कहा है कि यह “अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता देने” वाली नीति है। सरकार का कहना है कि यह कदम कंपनियों को सिस्टम में बार-बार एप्लीकेशन फाइल करने से रोकेगा और गलत तरीकों से वीज़ा लेने वालों पर अंकुश लगाएगा। साथ ही, जो कंपनियां वाकई में हाई-स्किल्ड वर्कर्स को अमेरिका लाना चाहती हैं, उनके लिए भी प्रक्रिया सरल होगी।
भारतीय आवेदकों पर असर
H-1B वीज़ा के लिए भारत सबसे बड़ा आवेदक देश है। लॉटरी सिस्टम खत्म होने से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, खासकर फ्रेशर्स और जूनियर लेवल के इंजीनियर्स, जिनकी सैलरी कम होती है, उनके चुने जाने की संभावना बहुत कम हो जाएगी। इसके विपरीत, सीनियर और बहुत ज़्यादा अनुभवी प्रोफेशनल्स, जिन्हें बड़ी सैलरी मिलती है, उनके पास ज़्यादा मौके होंगे।
कब तक लागू होगा नया नियम?
यह प्रस्ताव अभी फाइनल नहीं हुआ है और इसे लागू होने में कुछ महीने या साल भी लग सकते हैं। अगर यह नियम फाइनल हो जाता है, तो संभवत: 2026 के H-1B रजिस्ट्रेशन से पहले, यानी मार्च 2026 से इसे लागू किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु (सारांश)
| मुख्य बदलाव | विवरण |
|---|---|
| लॉटरी सिस्टम | समाप्त होने की तैयारी, अब वेटेड सिलेक्शन (भारित चयन) प्रस्तावित |
| सैलरी स्तर | जितनी ज़्यादा सैलरी, उतनी ज़्यादा चयन की संभावना |
| $1,00,000 फीस | नए आवेदनों पर अब $1,00,000 (लगभग १ करोड़ रुपये) का एक्स्ट्रा शुल्क |
| भारत पर असर | फ्रेशर्स और जूनियर इंजीनियर्स का चयन कम, सीनियर और हाई-सैलरी वालों का ज़्यादा |
| कब लागू होगा | 2026 के रजिस्ट्रेशन से पहले, यानी मार्च 2026 के आसपास |